काठमांडू। निर्माण पक्ष के अनुसार, निर्माण टीम ने वर्षों से परियोजना के खिलाफ दायर कई मामलों में ठमेल में छाया कॉम्प्लेक्स के निर्माण को रोकने का आदेश जारी नहीं किया है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रहे कई आरोपों को अदालतों द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया है।
पहला मामला काठमांडू जिला अदालत में दायर किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि भगवान बहल गुठी 2070 में जमीन के थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक और रिट याचिका जनसरोकार के मुद्दे का हवाला देते हुए दायर की गई। इसके तुरंत बाद, एक और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, जिसमें दावा किया गया कि ILO-169 स्वदेशी समुदायों के लिए एक सांस्कृतिक स्थल है।
निर्माण पक्ष के अनुसार, अदालत ने तीनों मामलों में निर्माण को रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। इसके बजाय, इस परियोजना ने यह निष्कर्ष निकालने के बाद ही गति पकड़ी कि कानूनी प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं थी।
छाया कॉम्प्लेक्स ने दावा किया है कि उसने परियोजना शुरू होने से पहले काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी से नक्शे को मंजूरी देने, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, योजना परमिट और सार्वजनिक सुनवाई सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है।
निर्माण पक्ष के अनुसार, भूमि के स्वामित्व के मुद्दे पर अदालत द्वारा दशकों पहले ही विभिन्न निर्णय लिए जा चुके हैं। उनके अनुसार, भूमि रिकॉर्ड, भूमि राजस्व दस्तावेज, भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र और राणा युग के अदालत के फैसले भूमि का कानूनी आधार हैं।
हालांकि, सार्वजनिक बहस में कंस्ट्रक्शन पार्टी का आरोप है कि कोर्ट में केस दायर होने के तथ्य को ‘अवैध संरचना’ के सबूत के तौर पर पेश किया गया है। उनका कहना है कि जिस प्रोजेक्ट को कोर्ट ने कंस्ट्रक्शन नहीं रोकने का आदेश दिया है, उसे अगर लगातार अवैध करार दिया जाता है तो इससे न्यायिक व्यवस्था में विश्वास कम होने का खतरा है।

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