काठमांडू। सरकार ने महानगरों और उप-महानगरों में लाइसेंस प्राप्त कंपनियों के माध्यम से 30 मिलियन रुपये से अधिक के रियल एस्टेट लेनदेन को अनिवार्य बनाने के नवीनतम निर्णय को फिलहाल टाल दिया है।
भूमि प्रबंधन एवं अभिलेखागार विभाग ने बुधवार (2 मार्च) को भू-राजस्व कार्यालयों को नया नोटिस जारी किया है।
नए प्रावधान को लागू करने के लिए विभाग की ओर से 21 फरवरी को जारी सर्कुलर को फिलहाल रोक दिया गया है। विभाग के अनुसार, निर्णय के स्थगित होने का मुख्य कारण तकनीकी तैयारी की कमी है।
भू-राजस्व नियम, 2036 के नियम 23 (एल) के अनुसार, ऐसे लाइसेंसधारी व्यक्तियों या संगठनों को भूमि सेवा केंद्रों का संचालन करना होगा और भूमि सूचना प्रणाली के माध्यम से लेनदेन करना होगा। हालांकि, सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त 36 कंपनियों को अभी तक भूमि सेवा केंद्र संचालित करने की अनुमति नहीं मिली है और तकनीकी कार्य अभी तक नहीं किया गया है।
रियल एस्टेट लेनदेन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए, विभाग ने भू-राजस्व अधिनियम, 2034 की धारा 26 (ए) के अनुसार 36 कंपनियों को लाइसेंस प्रदान किया था।
नए प्रावधान के अनुसार, सरकार 8 मार्च से काठमांडू, ललितपुर, भरतपुर, बीरगंज और बिराटनगर सहित सभी 11 उप-महानगरों में नया नियम लागू कर रही है।
विभाग के इस ताजा कदम से आम जनता को 3 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन खरीद-बिक्री करते समय लाइसेंस प्राप्त कंपनी की तलाश अनिवार्य नहीं करनी पड़ेगी।
सेवा प्राप्तकर्ता पहले की तरह ही नियमित प्रक्रिया के माध्यम से अपने रियल एस्टेट विलेखों को मंजूरी और हस्तांतरण करने में सक्षम होंगे। विभाग के अनुसार यह नई व्यवस्था तभी लागू होगी जब लाइसेंस प्राप्त कंपनियां तकनीकी तैयारी पूरी कर लैंड सर्विस सेंटर को संचालित करने की अनुमति प्राप्त कर लेंगी।

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