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आज है कुशी औंसी, फादर्स डे

कालोपाटी

16 मिनट ago

काठमांडू। वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी आज अपने घरों में पवित्र कुश लाकर कुशे औंसी और पिता के मुख की अमावस्या मना रहे हैं। भद्र कृष्ण औंसी के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व में पूरे वर्ष देवताओं और पितरों के कार्यों में उपयोग किए जाने वाले कुश को घर पर रखने की परंपरा है।

शास्त्रों के रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि कुश को ब्राह्मण द्वारा पूजा करके जजमान के घर ले जाने से परिवार का कल्याण होता है। सनातन धर्म के भक्त कुश, तुलसी, पीपल और शालिग्राम को भगवान विष्णु का प्रतीक मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने तर्कशील प्राणी के साथ-साथ पवित्र कुश की रचना भी की थी।

सनातन संस्कार में कुश को पवित्र पौधे के रूप में उपयोग करने की परंपरा है। कुश का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों, श्रद्धा, तर्पण और अन्य अनुष्ठानों में किया जाता है। कुश यानी पवित्री से बनी अंगूठी पहनने की भी परंपरा है।

कुशी औंसी को पिता का चेहरा देखने के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन बच्चे अपने पिता को मिठाई, फल, भोजन और कपड़े उपहार में देकर सम्मानित करते हैं। जो बच्चे दूर या विदेश में हैं वे अपने पिता से फोन और अन्य माध्यमों से बात करके अपना सम्मान व्यक्त करते हैं।

विभिन्न धार्मिक और पवित्र तीर्थ स्थलों पर जाकर मृतक पिता के नाम पर श्रद्धा, तर्पण, पिंडदान और सीदान की परंपरा है। काठमांडू में गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर, रसुवा की बेत्रावती, तनहुँ के देवघाट, सुनसरी के बिष्णुपादुका और बराहक्षेत्र सहित तीर्थ स्थलों पर पूर्वजों की याद में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

काठमांडू के उत्तर-पूर्व भाग में गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में आज एक विशेष मेला आयोजित किया गया है। मृतक पिता के नाम पर तर्पण, पिंडदान और सिद्धारण करने के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। चूंकि गोकर्णेश्वर को उत्तरगया के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए आज की अमावस्या को गोकर्ण औंसी भी कहा जाता है।

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