काठमांडू। स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को किसी भी कीमत पर स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं करने का निर्देश दिया है। यह कहते हुए कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की प्रक्रिया चल रही है, मंत्रालय ने सरकार से चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना जारी रखने का आग्रह किया।
मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता डॉ. समीर कुमार अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय का ध्यान हाल के समय में डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और स्वास्थ्य संस्थानों के उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की घटनाओं की ओर आकर्षित किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित निकाय दोषियों की पहचान करने और कानूनी कार्रवाई करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
नारायणी अस्पताल में एक डॉक्टर पर हुए हमले के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने कहा है कि घायल डॉक्टर डॉ. प्रमोद राम को आगे के इलाज के लिए काठमांडू लाने की व्यवस्था की गई है और वे उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए हैं। मंत्री मेहता ने सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित होने से रोकने के लिए निरंतर प्रयास करने का निर्देश दिया।
मंत्रालय ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी अस्पतालों से नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से शुरू करने का आग्रह किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों के उपचार में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य सेवा आवश्यक, जीवन रक्षक और संवेदनशील सेवा है।
बयान में कहा गया है कि सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में अपनी सेवाएं प्रदान करना स्वास्थ्य कर्मियों का अधिकार है, बयान में सभी अस्पतालों से अपील की गई है कि वे नागरिकों के उपचार में बाधा डाले बिना स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना जारी रखें।

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