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मध्य पूर्व युद्ध के 14 दिनों में 5 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन

कालोपाटी

2 घंटे ago

काठमांडू। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजरायल युद्ध के 14 दिनों में ईरान 50 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से प्रभावित हुआ है। यह दुनिया के 84 देशों के कुल उत्सर्जन से अधिक है जो कम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं।

द गार्जियन ने क्लाइमेट एंड कम्युनिटीज इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि ईरान में युद्ध एक जलवायु आपदा बन गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, विमानों, जहाजों और अन्य सैन्य वाहनों ने 14 दिनों में 150 मिलियन से 270 मिलियन लीटर ईंधन की खपत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य उपकरणों को हुए नुकसान से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश उत्सर्जन नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान के कारण हुआ था। ईरान की रेड क्रिसेंट राहत और बचाव एजेंसी के अनुसार, हमले में लगभग 20,000 इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लड़ाकू विमान, बमवर्षक और नौसैनिक जहाज ऊर्जा की खपत में वृद्धि जारी रखते हैं। ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने वाले हमलों ने भी उत्सर्जन में वृद्धि में योगदान दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में 2.5 मिलियन से 59 लाख बैरल तेल नष्ट हो गया।

रिपोर्ट के अनुसार, 5 करोड़ 55 हजार 16 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कुवैत या आइसलैंड जैसे देशों के वार्षिक उत्सर्जन के बराबर है।

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