काठमांडू। दरबारमार्ग स्थित तिंधारा पाठशाला से चैते दशईं के दिन शुरू होने वाले वर्षा और अच्छी फसल के देवता सेतो मछेंद्रनाथ के रथ जुलूस के लिए रथ का निर्माण किया जा रहा है।
गुठी संस्थान के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से रथों का निर्माण शुरू हो गया है। निगम प्रवक्ता जनक पोखरेल ने आरएसएस को बताया कि रथ का निर्माण चैत्र शुक्ल सप्तमी यानी चैत्र 11 पर किया जाएगा।
सेतो मछेंद्रनाथ का रथ जुलूस 26 मार्च को शाम 4:00 बजे से तिंधार पाठशाला से शुरू होगा। हर साल राजधानी में चैत्र शुक्ल अष्टमी से दशमी तक सेतो मछेंद्रनाथ का रथ जुलूस निकलता है।
इस साल रथ को पहले दिन 26 मार्च को आसन ले जाया जाएगा। रथ आने के बाद पूजा-अर्चना की जाएगी। शहर के भीतरी हिस्से में तीन दिनों तक रथ जुलूस चलेगा। रथ जुलूस आसन, बसंतपुर, जयसीडोल और लगन से होकर गुजरेगा और फिर मछेंद्रबहाल में समाप्त होगा। निगम के लिए रथ निर्माण की व्यवस्था करने का रिवाज है।
सेतो मछेन्द्रनाथ के पुजारी तथा समिति संयोजक एवं काठमांडू महानगर-२५ के पूर्व अध्यक्ष नीलकाजी शाक्य के अनुसार २५ मार्च को चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन कुमारी को तीनधारा पाठशाला के परिसर में ले जाने की परंपरा है।
राष्ट्रपति 26 मार्च की रात को दौरा करेंगे
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल 26 मार्च को रात करीब 10 बजे रथ पर जाएंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। ऐसी परंपरा है कि श्वेत मछेंद्रनाथ के रथ को खींचने की रात को राज्य का मुखिया आसन पर पहुंचकर पूजा करता है और प्रसाद ग्रहण करता है।
तिंधारा पाठशाला के सामने 32 हाथ लंबा रथ बनाया गया है और चैते दशईं के दिन से खींचा जा रहा है। इस रथ को नागराज का प्रतीक माना जाता है। एक धार्मिक मान्यता है कि हर साल इस त्योहार के बाद बारिश और असर होगा। दूसरे दिन यानी 13 मार्च को रथ को आसन से बसंतपुर के कालभैरव तक ले जाया जाता है।
तीसरे दिन यानी 28 मार्च को जात्रा को बसंतपुर से लगन ले जाने और लग्न ले जाने की परंपरा है। श्वेत मछेंद्रनाथ की माता के मंदिर में रथ को तीन बार घुमाया जाता है। राजधानी में श्वेत मछेंद्रनाथ की रथयात्रा पूरी होने के बाद रातो मछेंद्रनाथ की रथयात्रा निकलती है।

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