काठमांडू। सीपीएन-यूएमएल के केंद्रीय सदस्य और पूर्व मंत्री गोकुल प्रसाद बास्कोटा ने नेपाली पक्ष के विरोध को नजरअंदाज करते हुए लिपुलेख दर्रे का इस्तेमाल कर चीन के साथ व्यापार करने की भारत की तैयारी पर निराशा जताई है।
सीपीएन-यूएमएल नेता बास्कोटा ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने घोषणा की कि भारत-चीन व्यापार मार्ग को नेपाल के लिपुलेख क्षेत्र के माध्यम से 1 जून से फिर से खोला जाएगा, जो पिछले पांच वर्षों से बंद है।
उन्होंने रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “लिपुलेख का नक्शा हमारा है, किसी और ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया है। हमें एक सौ बीस बिलियन डॉलर का वार्षिक कारोबार करने की दो पड़ोसियों की योजना के एक छोटे से व्यापारिक बिंदु के बगल में बैठना पड़ा। यह ऐसा ही है – शक्ति और समय का संयुक्त झटका 1′

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