काठमांडू। काठमांडू शुक्रवार को दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। स्विट्जरलैंड में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय वायु प्रदूषण माप संगठन आईक्यू एयर के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 100 शहरों में काठमांडू में सबसे प्रदूषित वायु गुणवत्ता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शुक्रवार को 158 अंक पर पहुंच गया। सार्वजनिक स्वास्थ्य के मामले में यह एक बहुत ही अस्वास्थ्यकर स्तर है। हनोई (वियतनाम) (164), लाहौर (पाकिस्तान) (162), कोलकाता (भारत) और दिल्ली (160) दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव के संदर्भ में स्कोर को 0 से 500 तक विभाजित करते हुए 201 और 300 के बीच के एक्यूआई को बैंगनी रंग दिया गया है। इस स्तर पर खुले में कोई भी शारीरिक गतिविधि न करने की सलाह दी जाती है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत अस्वास्थ्यकर है।
ऐसे में घर के अंदर रहना फायदेमंद माना जाता है। बैंगनी रंग से ऊपर के स्तर यानी 300 से ऊपर के एक्यूआई को मैरून रंग दिया जाता है, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर माना जाता है।
डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन, जंगल की आग से निकलने वाला धुआं, ईंट कारखाने, कृषि अवशेषों को जलाने से होने वाला उत्सर्जन और कचरा जलाने से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण माना जाता है।
वायु प्रदूषण के कारण हाल के वर्षों में श्वसन कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक से पीड़ित लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो शरीर के अधिकांश अंगों को प्रभावित करता है।


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