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चावल का आयात बढ़ा, 7 महीने में चावल का आयात 25.5 अरब रुपये घटा

कालोपाटी

15 मिनट ago

काठमांडू। कृषि प्रधान देश में हर साल चावल का आयात बढ़ता जा रहा है।

सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, नेपाल ने चालू वित्त वर्ष 2082-83 के पहले सात महीनों में 25.48 अरब रुपये का चावल आयात किया।

पिछले वित्त वर्ष 2081/82 की समान अवधि में इस तरह का आयात 25.37 अरब रुपये का हुआ था। हालांकि चावल के कुल आयात में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस साल धान के बजाय विदेशों से रेडीमेड चावल के आयात में काफी वृद्धि हुई है।

पिछले साल की तुलना में इस साल धान का आयात कम हुआ है जबकि चावल का आयात बढ़ा है। पिछले साल की समान अवधि में 14.51 अरब रुपये का धान आयात चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में घटकर 12.74 अरब रुपये मूल्य का 3,48,137 टन रह गया है।

हालांकि, देश में धान कूटने के बजाय रेडीमेड चावल के आयात की प्रवृत्ति बढ़ने से चावल का आयात बढ़ा है। पिछले साल 6.20 अरब रुपये मूल्य के 92,751 टन चावल का आयात किया गया था, जबकि इस साल 7.24 अरब रुपये मूल्य के 113,793 टन चावल का आयात किया गया था।

इसी तरह, बासमती चावल का आयात पिछले साल के 40,449 टन से बढ़कर 46,013 टन (95.12 बिलियन) हो गया है।

मुख्य चावल के अलावा, गेहूं और चावल के बीज का आयात भी इस साल असामान्य रूप से बढ़ा है। पिछले साल कनिका का 88 टन (करीब 28 लाख रुपये) का आयात इस साल बढ़कर 6,268 टन (925.94 करोड़ रुपये) हो गया है।

इसी तरह, चावल के बीज का आयात पिछले साल के 180 टन से बढ़कर इस साल 210.22 मिलियन टन हो गया।

पिछले साल ब्राउन राइस ने 2.5 टन (4.48 लाख रुपये) का आयात किया था, जबकि इस साल करीब 5 टन (5.47 लाख रुपये) का आयात किया गया है।

हालांकि चावल और चावल के कुल आयात मूल्य में वृद्धि हुई है, लेकिन सरकार के सीमा शुल्क राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में कमी आई है। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में इन वस्तुओं के आयात से 2.31 अरब रुपये का राजस्व प्राप्त किया था।

हालांकि, चालू वित्त वर्ष की इसी अवधि में ऐसा राजस्व घटकर 1.77 अरब रुपये रह गया है। कुल राजस्व में कमी मुख्य रूप से चावल के आयात में कमी और चावल की राजस्व दर में परिवर्तन के कारण है। पिछले साल धान के आयात से केवल 1.08 अरब रुपये का राजस्व एकत्र किया गया था, लेकिन इस साल केवल 637.6 करोड़ रुपये ही एकत्र हुए हैं।

इससे न केवल देश का व्यापार घाटा बढ़ा है बल्कि कृषि में आत्मनिर्भर बनने के सरकार के लक्ष्य के लिए भी चुनौती खड़ी हो गई है।

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